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झांसी तिराहे पर अतिक्रमण हटाने पहुंची नपा अध्यक्ष, प्रशासनिक सहयोग न मिलने पर लौटीं

झांसी तिराहे पर अतिक्रमण हटाने पहुंची नपा अध्यक्ष, प्रशासनिक सहयोग न मिलने पर लौटीं


 शिवपुरी,हाईकोर्ट के आदेश और 5 अक्टूबर की समय-सीमा के बावजूद नहीं हट सका कथित अतिक्रमण, मौके पर भीड़ जुटने के बाद बनी स्थिति


शिवपुरी। शहर के झांसी तिराहे स्थित भारत पेट्रोल पंप के आसपास लंबे समय से चले आ रहे कथित अतिक्रमण का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। सोमवार, 5 अक्टूबर को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की समय-सीमा के बीच नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा मौके पर पहुंचीं, लेकिन बताया जा रहा है कि पर्याप्त प्रशासनिक सहयोग और पुलिस बल उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें कार्रवाई किए बिना ही वापस लौटना पड़ा।


मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि संबंधित भूमि को लेकर लंबे समय से विवाद चलने की बात सामने आ रही है। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि इस भूमि पर वर्ष 1980 से पहले से कब्जा बताया जाता है और इसे लेकर न्यायालय में भी मामला पहुंच चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अतिक्रमण हटाने को लेकर हाईकोर्ट के आदेश का हवाला भी दिया जाता रहा है, बावजूद इसके अब तक जमीन पूरी तरह अतिक्रमण मुक्त नहीं हो सकी है।


कार्रवाई के लिए पहुंचीं अध्यक्ष, मौके पर जुटी भीड़


जानकारी के अनुसार नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा सोमवार को अमले के साथ कथित अतिक्रमण हटाने के लिए मौके पर पहुंचीं। कार्रवाई की तैयारी के दौरान मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। स्थिति को देखते हुए प्रशासनिक एवं पुलिस सहयोग की आवश्यकता महसूस हुई, लेकिन अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने के कारण कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी।


इसके बाद नगर पालिका अध्यक्ष को वापस लौटना पड़ा। इस घटनाक्रम ने नगर पालिका और प्रशासन के बीच समन्वय को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।


आखिर न्यायालय के आदेश का पालन कब?


स्थानीय लोगों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि वास्तव में न्यायालय द्वारा अतिक्रमण हटाने के संबंध में कोई प्रभावी आदेश पारित किया गया है, तो उसका पालन अब तक क्यों नहीं हो पाया? वहीं यदि इस भूमि को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट अथवा किसी अन्य न्यायालय में विचाराधीन है और उस पर कोई स्थगन आदेश प्रभावी है, तो प्रशासन को इसकी स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।


इसी तरह जमीन के स्वामित्व, लीज अथवा अन्य वैधानिक अधिकारों से संबंधित दस्तावेज भी जांच का विषय हैं। स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जा रहा है कि संबंधित पक्ष के पास जमीन की कोई वैध लीज अथवा अनुबंध उपलब्ध नहीं है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित दस्तावेजों की जांच प्रशासनिक स्तर पर ही स्पष्ट हो सकती है।


छोटे कब्जों पर कार्रवाई, बड़े कब्जों पर सवाल क्यों?


इस पूरे मामले के बाद शहर में एक बड़ा सवाल चर्चा में है—क्या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सभी के लिए समान है?


शहर में छोटे दुकानदारों, गरीब परिवारों और छोटे कब्जाधारियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई अक्सर देखने को मिलती है। ऐसे में लोगों का सवाल है कि यदि झांसी तिराहे की जमीन पर भी अतिक्रमण प्रमाणित है, तो वहां कार्रवाई करने में इतनी कठिनाई क्यों आ रही है?


लोग यह भी जानना चाहते हैं कि प्रशासन के पास इस जमीन को लेकर कौन-कौन से न्यायालयीन आदेश, राजस्व रिकॉर्ड और लीज संबंधी दस्तावेज मौजूद हैं।


सिंधिया के बयान के बाद प्रशासन पर बढ़ा दबाव


भू-माफिया और अवैध कब्जों को लेकर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया द्वारा भी सार्वजनिक रूप से सख्त रुख अपनाने की बात कही जाती रही है। ऐसे में झांसी तिराहे का यह मामला प्रशासन के लिए भी एक परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है।


अब सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन नगर पालिका अध्यक्ष के साथ पर्याप्त पुलिस एवं प्रशासनिक अमला भेजकर दोबारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करेगा?


अब प्रशासन से स्पष्ट जवाब की मांग


इस पूरे मामले में प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े हैं—


- क्या संबंधित भूमि पर वास्तव में न्यायालय का अतिक्रमण हटाने संबंधी आदेश प्रभावी है?

- यदि मामला किसी उच्च न्यायालय में विचाराधीन है तो क्या कोई स्थगन आदेश लागू है?

- भूमि का वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड क्या कहता है?

- संबंधित पक्ष के पास वैध लीज अथवा अन्य अधिकार संबंधी दस्तावेज हैं या नहीं?

- 5 अक्टूबर की निर्धारित समय-सीमा के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी?

- मौके पर नगर पालिका अध्यक्ष को पर्याप्त पुलिस एवं प्रशासनिक सहयोग क्यों नहीं मिला?

- क्या प्रशासन दोबारा पूरी तैयारी के साथ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करेगा?


फिलहाल झांसी तिराहे का यह मामला सिर्फ एक अतिक्रमण की कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि न्यायालय के आदेशों के पालन, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और शहर में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में समानता को लेकर भी सवाल खड़े कर रहा है। अब निगाहें जिला प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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