शिवपुरी में नशे के कारोबार पर शिकंजा, अब बड़े मगरमच्छों की बारी?
लगातार हो रही स्मैक की कार्रवाई से बढ़े सवाल—पुलिस के हाथ लग रहे छोटे सप्लायर, क्या अब सामने आएगा नशे के नेटवर्क का पूरा सच?
शिवपुरी। जिले में नशे के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार तेज होती दिखाई दे रही है। हाल के दिनों में स्मैक और अन्य मादक पदार्थों की बरामदगी के कई मामले सामने आए हैं। कार्रवाई में पुलिस छोटे स्तर पर नशा बेचने वालों को गिरफ्तार कर रही है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इन आरोपियों तक नशे की खेप पहुंचाने वाले असली सप्लायर कौन हैं और इस पूरे नेटवर्क के पीछे कौन लोग हैं?
सितंबर में कोतवाली पुलिस ने 62.16 ग्राम स्मैक, जिसकी कीमत करीब 12 लाख रुपये बताई गई, के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक आरोपी स्मैक बेचने की फिराक में था और उससे जुड़े स्रोतों तथा नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। �
इससे पहले सितंबर की शुरुआत में कोतवाली पुलिस ने राजस्थान से शिवपुरी लाई गई बताई गई 38.50 ग्राम स्मैक बरामद करने की कार्रवाई की थी। पुलिस के अनुसार, तीन दिनों में ही अलग-अलग कार्रवाइयों में 72.35 ग्राम स्मैक बरामद हुई थी और दूसरे जिलों व राज्यों से शिवपुरी में नशीला पदार्थ लाने वालों की जानकारी जुटाई जा रही थी। �
वहीं करैरा में भी 19 सितंबर को पुलिस ने 11.15 ग्राम स्मैक के साथ दो युवकों को गिरफ्तार किए जाने की खबर सामने आई। �
इन लगातार कार्रवाइयों के बीच असली चुनौती नशे की सप्लाई चेन तक पहुंचने की है। एक आरोपी के पास से स्मैक बरामद होना कार्रवाई का एक हिस्सा है, लेकिन जांच का अगला सवाल यह है कि—
नशीला पदार्थ शिवपुरी तक कहां से पहुंच रहा है?
स्थानीय स्तर पर इसकी सप्लाई कौन कर रहा है?
छोटे विक्रेताओं को माल उपलब्ध कराने वाले लोग कौन हैं?
क्या अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार आरोपियों के बीच कोई कनेक्शन है?
दूसरे जिलों या राज्यों से आने वाली खेप का नेटवर्क कितना बड़ा है?
क्या पुलिस पुराने मामलों के आरोपियों और उनके संपर्कों को भी खंगाल रही है?
सरकारी दफ्तर तक पहुंचा नशा, जांच की जरूरत और बढ़ी
सितंबर में कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण केंद्र के एक प्राचार्य की टेबल की दराज से पुलिस द्वारा 14 पुड़िया कथित स्मैक बरामद किए जाने का मामला भी सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार कुल वजन 1.66 ग्राम बताया गया और पुलिस ने मोबाइल तथा कार्यालय की CCTV DVR भी जांच के लिए जब्त की। मामले में NDPS Act के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। �
यह मामला इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि जांच केवल बरामद पदार्थ और आरोपी तक सीमित न रहकर यह पता लगाने पर केंद्रित हो कि नशीला पदार्थ वहां तक पहुंचा कैसे और क्या किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी।
नशे के खिलाफ कार्रवाई के साथ अवैध शराब पर भी दबाव
जिले में अवैध शराब को लेकर भी हाल में विरोध सामने आया है। अमोल में महिलाओं और पुलिस-आबकारी टीम के बीच विवाद तथा अवैध शराब की बिक्री के आरोपों को लेकर प्रदर्शन की खबरें सामने आईं। � बैराड़ क्षेत्र में भी पुलिस ने 60 लीटर हाथभट्टी की कच्ची शराब जब्त कर आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। �
पुलिस की लगातार कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि नशीले पदार्थों के खिलाफ अभियान चल रहा है। लेकिन कार्रवाई का अगला चरण सिर्फ छोटे विक्रेताओं तक सीमित न रहकर सप्लाई के स्रोत और पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का होना जांच का महत्वपूर्ण पहलू रहेगा।
सवाल अब यही है—क्या पुलिस उन लोगों तक भी पहुंच पाएगी, जो पर्दे के पीछे रहकर नशे की खेप शिवपुरी तक पहुंचाने का काम करते हैं?

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