शिवपुरी में पत्रकार को जान से मारने की धमकी! भड़के पत्रकारों ने SP को सौंपा ज्ञापन, आरोपी को जिला बदर करने की मांग
बैराड़ में कब्रिस्तान की भूमि का मुद्दा उठाने के बाद धमकी मिलने का आरोप, ऑडियो रिकॉर्डिंग भी पुलिस को सौंपी
शिवपुरी। जिले के बैराड़ क्षेत्र में पत्रकार प्रिंस प्रजापति को जान से मारने और हाथ-पैर तोड़ने की धमकी मिलने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के विरोध में पोहरी, बैराड़ और शिवपुरी के पत्रकारों ने एकजुट होकर पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा और आरोपी के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की मांग की। पत्रकारों ने आरोपी का नाम गुंडा सूची में दर्ज करने, जिला बदर की कार्रवाई शुरू करने और पीड़ित पत्रकार को सुरक्षा देने की मांग भी उठाई है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायत के मुताबिक, मामला बैराड़ की हनुमान कॉलोनी स्थित हनुमान मंदिर के सामने आवंटित कब्रिस्तान की भूमि को अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग से जुड़ा है। 10 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में स्थानीय हिंदू समाज और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बैराड़ तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा था। आरोप है कि इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद पत्रकार प्रिंस प्रजापति को धमकियां मिलने लगीं।
पहले फोन पर धमकी, फिर रास्ते में रोककर गाली-गलौज का आरोप
शिकायत में बताया गया है कि 12 अक्टूबर 2026 को बैराड़ निवासी साबिर खान ने नईदुनिया के संवाददाता माखन धाकड़ को फोन कर कथित तौर पर प्रिंस प्रजापति को कब्रिस्तान के मुद्दे पर नहीं बोलने की चेतावनी दी। आरोप है कि बातचीत के दौरान जान से नुकसान पहुंचाने की धमकी भी दी गई। इस बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग पुलिस को सौंपे जाने की बात कही गई है।
इसके बाद 15 अक्टूबर 2026 को पशु चिकित्सालय, बैराड़ के पास पत्रकार प्रिंस प्रजापति को रास्ते में रोककर गाली-गलौज करने तथा जान से मारने और हाथ-पैर तोड़ने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में बैराड़ थाने में पहले ही रिपोर्ट दर्ज कराए जाने की जानकारी दी गई है।
पुराने आपराधिक मामलों का हवाला, जिला बदर की मांग
पुलिस अधीक्षक को सौंपे गए ज्ञापन में पत्रकारों ने आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ वर्ष 2011 से विभिन्न थानों में मारपीट, गंभीर चोट, धमकी, अपहरण, पॉक्सो एक्ट, दुष्कर्म और अवैध हथियारों सहित कई गंभीर अपराधों के मामले दर्ज हैं। इन आरोपों और कथित आपराधिक रिकॉर्ड की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
पत्रकारों ने रखीं ये प्रमुख मांगें
पत्रकारों ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि उपलब्ध ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच कर उचित वैधानिक कार्रवाई की जाए। साथ ही, मामले में गिरफ्तारी की आवश्यकता पर नियमानुसार कार्रवाई, गुंडा सूची में नाम दर्ज करने, जिला बदर की प्रक्रिया शुरू करने और पीड़ित पत्रकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन इस मामले में जांच के आधार पर क्या कदम उठाता है। पत्रकारों का कहना है कि पत्रकारों को धमकाकर जनहित के मुद्दे उठाने से रोकने के प्रयासों पर प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।
नोट: खबर में धमकी, कथित आपराधिक रिकॉर्ड और अन्य आरोप शिकायत एवं ज्ञापन में किए गए दावों के आधार पर प्रस्तुत हैं। संबंधित आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और आधिकारिक अभिलेखों से की जानी चाहिए।

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