शिवपुरी के बहुचर्चित मामले में हाईकोर्ट का बड़ा रुख, अग्रिम जमानत पर राहत नहीं! शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता रणजीत सिंह रावत ने की पैरवी, हिरासत में पूछताछ को बताया जांच के लिए जरूरी
ग्वालियर/शिवपुरी। शिवपुरी के महिला थाने में दर्ज एक बहुचर्चित मामले में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने 16 अक्टूबर 2026 को अग्रिम जमानत आवेदन पर सुनवाई की। मामले में शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता रणजीत सिंह रावत ने पैरवी की।
न्यायमूर्ति राजेश कुमार गुप्ता की पीठ के समक्ष प्रस्तुत इस मामले में आवेदक अजय राज सक्सेना ने अग्रिम जमानत की मांग की थी। प्रकरण शिवपुरी महिला थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 42/2026 से संबंधित है।
क्या है पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, शिकायतकर्ता वर्ष 2022 में आवेदक के संपर्क में आई थी और वर्ष 2023 में उसके कार्यालय में काम करने लगी। आरोप है कि अगस्त 2024 से सितंबर 2026 के बीच विवाह का आश्वासन देकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए गए, जबकि आवेदक पहले से विवाहित था।
शिकायत के अनुसार, 30 सितंबर 2026 को आवेदक के घर पर उसकी मां और पत्नी ने शिकायतकर्ता के साथ कथित तौर पर डंडों से मारपीट की, जिससे उसे चोटें आईं और मोबाइल फोन भी क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बाद महिला थाने में मामला दर्ज किया गया।
जमानत का विरोध, हिरासत में पूछताछ पर जोर
सुनवाई के दौरान आवेदक के अधिवक्ता ने उसे निर्दोष बताते हुए अग्रिम जमानत देने की मांग की। वहीं, राज्य सरकार और शिकायतकर्ता की ओर से जमानत का विरोध किया गया।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि मामले की उचित जांच के लिए आवेदक से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। इस मामले में शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता रणजीत सिंह रावत ने पक्ष रखा।

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