आदिवासी प्राथमिक बालक आश्रमशाला डबिया की शाला रसोइया के भरोसे,
शिवपुरी सरकार हर महीने लाखों खर्च कर रही है और आदिवासी बालक बालिकाओं को लेकर लेकिन सुधार नाम की कोई चीज नहीं हैं,50 सीट के बालक छात्रावास में कुल 10 बच्चे ही मिले जब हमारी टीम न्यूज़ इंडिया की टीम ने अपनो पड़ताल के पाया की वहाँ ना तो अधीक्षक मिले ना ही शिक्षिका मिली बच्चो को ठीक से पढ़ना लिखना तक नहीं आता है ऐसे में सरकार टीचरों को वेतन वार्ता दे रही है,लेकिन टीचर ना ही समय से आते हैं और ना हीं शिक्षा का स्तर ठीक करपाते है शहर से दूर होने का काफी फायदा भी उठाते हैं शिक्षक भोपाल रहती हैं, ऐसे में अगर इन पर कर्यवाही नहीं हुई तो शिक्षा स्तर गिर जाएगा!
हमनें अधीक्षक मजबूत सिंह रावत से बात की तो उनका कहना था बम किसी काम से बाहर आ गए हैं रसोइया चलाने वाली बाई के हवाले शाला थी।

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