महत्वपूर्ण तथ्य छिपाकर परिवाद दायर करने का आरोप, शिकायतकर्ता व वकील की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
शिवपुरी। सोशल मीडिया पर चर्चित मामले में नया मोड़ सामने आया है। माननीय सीजेएम न्यायालय द्वारा स्कूल संचालक शिवकुमार गौतम के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के आदेश को जिला न्यायालय द्वारा निरस्त किए जाने के बाद शिकायतकर्ता रामजीलाल वर्मा एवं उनके अधिवक्ता की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोप है कि रामजीलाल वर्मा ने न्यायालय में प्रस्तुत परिवाद में शिवकुमार गौतम के साथ हुए पूर्व अनुबंध तथा अनुबंध के क्रियान्वयन के लिए लंबित वाद की जानकारी न्यायालय से छिपाई। वहीं परिवाद में यह भी आरोप लगाया गया कि शिवकुमार गौतम ने स्वयं को भूमि स्वामी बताकर अनुबंध किया था, जबकि संबंधित दस्तावेजों में ऐसी स्थिति नहीं दर्शाई गई है।
बताया जा रहा है कि रामजीलाल वर्मा ने न्यायालय में दायर अपने जवाब में शिवकुमार गौतम से कुल 64 लाख 27 हजार रुपये प्राप्त करना स्वीकार किया है। इसमें 40 लाख रुपये, 15 लाख रुपये तथा 9 लाख 27 हजार रुपये की राशि शामिल है।
मामले से जुड़े पक्ष का दावा है कि शिकायत का उद्देश्य अनुबंध पालन संबंधी वाद वापस लेने का दबाव बनाना था। आरोप यह भी लगाए गए हैं कि पहले पुलिस को शिकायतें दी गईं और बाद में न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया गया।
कानूनी जानकारों का मानना है कि यदि न्यायालय यह पाता है कि जानबूझकर तथ्य छिपाए गए या असत्य जानकारी प्रस्तुत की गई, तो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की संबंधित धाराओं एवं न्यायालय की अवमानना से जुड़े प्रावधानों के तहत कार्रवाई की संभावना बन सकती है। साथ ही न्यायालय के समक्ष झूठे साक्ष्य या भ्रामक जानकारी प्रस्तुत करने के मामले में धारा 340 के अंतर्गत कार्यवाही पर भी विचार किया जा सकता है।
हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों और अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही लिया जाएगा। फिलहाल मामला न्यायिक प्रक्रिया में विचाराधीन है।
(नोट: यह समाचार उपलब्ध आरोपों और दावों पर आधारित है। आरोपों की पुष्टि अथवा खंडन संबंधित न्यायिक प्रक्रिया एवं पक्षकारों के आधिकारिक बयान के आधार पर ही माना जाएगा।
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