कोलारस में मत्स्य पालन के तालाबों पर कब्जे का आरोप, मछुआ परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट
शिवपुरी जिले के कोलारस जनपद पंचायत क्षेत्र में मत्स्य पालन से जुड़े कई तालाब वर्षों से खाली पड़े होने के बावजूद उनकी नई विज्ञप्ति जारी नहीं की जा रही है। आरोप है कि प्रशासनिक लापरवाही के चलते स्थानीय मछुआ परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं, जबकि कुछ दबंग लोग अवैध रूप से तालाबों में मछली पालन कर सरकारी राजस्व और गरीब परिवारों के अधिकारों को नुकसान पहुँचा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि गुरीला तालाब, रामनगर तालाब, कूड़ा जागीर तालाब, राजगढ़ तालाब सहित कई तालाबों की नीलामी एवं आवंटन प्रक्रिया लंबे समय से लंबित है। स्थानीय मछुआरों का कहना है कि इन तालाबों की समय पर विज्ञप्ति जारी नहीं होने से सैकड़ों परिवार बेरोजगार हो गए हैं और उनके सामने जीवन यापन का संकट खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों और मछुआ समाज ने आरोप लगाया है कि कई वर्षों से कुछ प्रभावशाली लोग बिना वैधानिक प्रक्रिया के तालाबों में मछली पालन कर रहे हैं। इससे सरकार को राजस्व की हानि हो रही है, वहीं वास्तविक पात्र गरीब परिवार अपने अधिकारों से वंचित हैं।
मामले की शिकायत कई बार जिला प्रशासन और मत्स्य विभाग से की जा चुकी है, लेकिन अब तक जनपद पंचायत और संबंधित विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है।
मछुआ समाज ने मांग की है कि सभी खाली पड़े तालाबों की तत्काल विज्ञप्ति जारी कर पारदर्शी तरीके से आवंटन किया जाए तथा अवैध कब्जाधारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि गरीब परिवारों को रोजगार मिल सके और शासन को राजस्व का लाभ प्राप्त हो।

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